देश कोई रिक्शा तो है नहीं
जो फेफड़ों की ताक़त की दम पे चले
वह चलता है पैसों से
सरकार के बस का नहीं
देना सस्ती और उच्च शिक्षा
मुफ़्त इलाज भी
सरकार का काम नहीं
कल को तो आप कहेंगे
गिलहरी के बच्चे का भी
रखे ख़याल सरकार
वे विलुप्त होने की कगार पे हैं
परिन्दों से ही पूछ लो
क्या उन्हें उड़ना
सरकार ने सिखाया है..?
क्या उनके दुनके में
रत्ती-भर भी योगदान है सरकार का
जंगल में
बिना सरकारी अस्पताल के
एक बाघिन ने
आज ही दिया जन्म
तीन बच्चों को
एक हाथी के बच्चे ने
आज ही सीखा है नदी में तैरना
बिना सरकारी योगदान के
पार कर गया नीलगायों का झुण्ड
एक खौफ़नाक बहती नदी
सरकार का काम नहीं है
कि वो रहे चिन्तित
उन जर्जर पुलों के लिए
जिन्हें लाँघते है हर रोज़
ग़रीब गुरबा लोग
सरकार के पास नहीं है फुर्सत
हर ग़रीब आदमी की
चू रही छत का
रखती रहे वह ख़याल
और भी बहुत से काम है
जो करने हैं सरकार को
मसलन रोकनी है महँगाई
भेजनी है वहाँ सेना
जहाँ लोग बनने ही नहीं दे रहे हैं
सेज
सरकार को चलाना है देश
वह चलता है पैसों से
और पैसा है बेचारे अमीरों के पास
आज ही सरकार
करेगी गुज़ारिश अमीरों से
कि वे इस देश को
ग़रीबी में डूबने से बचाए
देश की भलाई के लिए
अमीर तस्करों तक के आगे
फैलाएगी अपनी झोली
बदले में देगी
उन्हें थोड़ी-सी रियायतें
क्योंकि देश कोई रिक्शा तो नहीं
जो फेफड़ों की ताक़त के दम पे चलें
वह तो चलता है पैसों से
....................... देश कोई रिक्शा तो है नहीं / सुरेश सेन निशांत
Thursday, December 1, 2011
Tuesday, September 27, 2011
अरे बचा लो देश
अरे बचा लो देश"...................!!!!!!!
देश लिया सब चूँस..........तुम्हारी ..............!
बचा खुचा लो ठूँस, तुम्हारी..............!
जबसे दर्शन किये तुम्हारे
जनता भूकों मर गई
ऐसे हो मनहूस, तुम्हारी.................!
किस पर जनता करे भरोसा
किसको गले लगाये
"सबके सब" फडतूस,तुम्हारी.......!
अन्व्याही फ़ाइल का
तब तक शीलभंग हो कैसे
मिले न जब तक घूंस, तुम्हारी ......!
बच्चे सब एयरकंडीसन
पत्नी वातानूकूलित,
मई भी तुमको पूस, तुम्हारी...............!
कुर्बानी को लाल हमारे
और तुम्हारे बेटे पढें अमेरिका रूस,
तुम्हारी.......................!
आप मरें तो चिता में लकड़ियाँ चन्दन की,
हमें घाँस और फूस, तुम्हारी ................!
तेल नहीं अपनी ढिबरी में और
तुम्हारे घर में इटली के फानूस, तुम्हारी..................!
तुमको चाहिए रात को व्हिस्की
और मटन की खुश्की
पियो सुबह तुम जूस, तुम्हारी..................!
अर्धनग्न है देश व्यवस्था
फिरें गरीब चड्डी में
नंगा चले जुलूस, तुम्हारी .............!
करेगा नंगा चौराहे पर एक दिन
तुम सबको "जन लोकपाल कानून",
तुम्हारी..................!
अरे बचा लो देश,
तुम्हारी.................!!!!!!!!!!!
*मानिक वर्मा*
देश लिया सब चूँस..........तुम्हारी ..............!
बचा खुचा लो ठूँस, तुम्हारी..............!
जबसे दर्शन किये तुम्हारे
जनता भूकों मर गई
ऐसे हो मनहूस, तुम्हारी.................!
किस पर जनता करे भरोसा
किसको गले लगाये
"सबके सब" फडतूस,तुम्हारी.......!
अन्व्याही फ़ाइल का
तब तक शीलभंग हो कैसे
मिले न जब तक घूंस, तुम्हारी ......!
बच्चे सब एयरकंडीसन
पत्नी वातानूकूलित,
मई भी तुमको पूस, तुम्हारी...............!
कुर्बानी को लाल हमारे
और तुम्हारे बेटे पढें अमेरिका रूस,
तुम्हारी.......................!
आप मरें तो चिता में लकड़ियाँ चन्दन की,
हमें घाँस और फूस, तुम्हारी ................!
तेल नहीं अपनी ढिबरी में और
तुम्हारे घर में इटली के फानूस, तुम्हारी..................!
तुमको चाहिए रात को व्हिस्की
और मटन की खुश्की
पियो सुबह तुम जूस, तुम्हारी..................!
अर्धनग्न है देश व्यवस्था
फिरें गरीब चड्डी में
नंगा चले जुलूस, तुम्हारी .............!
करेगा नंगा चौराहे पर एक दिन
तुम सबको "जन लोकपाल कानून",
तुम्हारी..................!
अरे बचा लो देश,
तुम्हारी.................!!!!!!!!!!!
*मानिक वर्मा*
Friday, September 16, 2011
ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है
यह जो छापा तिलक लगाये यह जो जनेऊ धारी हैं
यह जो जात पात पूजक हैं यह जो भ्रष्टाचारी हैं
यह जो भूपति कहलाता है जिसकी साहूकारी है
उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है
ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी
है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है
यह जो तिलक मांगता है लडके की धौंस जमाता है
कम दहेज़ पाकर लड़की का जीवन नर्क बनता है
पैसे के बल यह जो अनमेल ब्याह रचाता है
यह जो अन्याई है सब कुछ ताक़त से हथियाता है
उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है
ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी
है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है
यह जो कला धन फैला है यह जो चोर बाजारी है
सबका पाऊं चूमती जिसके ये सरमायेदारी है
यह जो यम सा बेटा है मतदाता की लाचारी है
उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है
ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी
है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है
यह जो जात पात पूजक हैं यह जो भ्रष्टाचारी हैं
यह जो भूपति कहलाता है जिसकी साहूकारी है
उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है
ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी
है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है
यह जो तिलक मांगता है लडके की धौंस जमाता है
कम दहेज़ पाकर लड़की का जीवन नर्क बनता है
पैसे के बल यह जो अनमेल ब्याह रचाता है
यह जो अन्याई है सब कुछ ताक़त से हथियाता है
उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है
ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी
है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है
यह जो कला धन फैला है यह जो चोर बाजारी है
सबका पाऊं चूमती जिसके ये सरमायेदारी है
यह जो यम सा बेटा है मतदाता की लाचारी है
उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है
ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी
है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे
यहाँ पर्वत पर्वत हीरे हैं यहाँ सागर सागर मोती हैं
ये सारा माल हमारा है
ये सारा माल हमारा है
ये सारा माल हमारा है
हम सारा खज़ाना मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे
हमारे खून बहे जो बाग़ उजड़े
जो गीत दिलों में कत्ल हुए
हर कतरों का हर गुंचे का
हर गीत का बदला मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे
जब सब सीधा हो जायेगा
जब सब झगडे मिट जायेंगे
हम मेहनत से उपजायेंगे
हम मेहनत से उपजायेंगे
हम मेहनत से उपजायेंगे
बस बाँट बाँट कर खायेंगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे
यहाँ पर्वत पर्वत हीरे हैं यहाँ सागर सागर मोती हैं
ये सारा माल हमारा है
ये सारा माल हमारा है
ये सारा माल हमारा है
हम सारा खज़ाना मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे
हमारे खून बहे जो बाग़ उजड़े
जो गीत दिलों में कत्ल हुए
हर कतरों का हर गुंचे का
हर गीत का बदला मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे
जब सब सीधा हो जायेगा
जब सब झगडे मिट जायेंगे
हम मेहनत से उपजायेंगे
हम मेहनत से उपजायेंगे
हम मेहनत से उपजायेंगे
बस बाँट बाँट कर खायेंगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे
Thursday, September 15, 2011
तस्वीर बदल दो दुनिया की
तोड़ो ये दीवारें भर दो अब ये गहरी खाई
तोड़ो ये दीवारें भर दो अब ये गहरी खाई
जागो दुखियारे इंसानों
तस्वीर बदल दो दुनिया की
चलती मशीनें ये तेरे ही हाथों से
उगते हैं फसलें ये तेरे ही हाथों से
क्यों फिर ले जाते हैं ? जुल्मी जोग तुम्हारी कमाई
उठो मजदूरों और किसानो
तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की
ये चौबारे महल उठाये हैं तूने
सुख के सब सामान जुटाए हैं तूने
फिर क्यों बच्चो ने तेरे हरदम आधी रोटी खाई
जागो मज़लूमो और जवानों
तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की
ज़ुल्मों की कब्र तेरे ही हाथ खुदेगी
तेरे ही हाथ नई दुनिया बनेगी
मत ये समझो तूने जीवन की सब पूँजी गवाई
उठ जाओ छात्रों और जवानों
तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की
तोड़ो ये दीवारें भर दो अब ये गहरी खाई
जागो दुखियारे इंसानों
तस्वीर बदल दो दुनिया की
चलती मशीनें ये तेरे ही हाथों से
उगते हैं फसलें ये तेरे ही हाथों से
क्यों फिर ले जाते हैं ? जुल्मी जोग तुम्हारी कमाई
उठो मजदूरों और किसानो
तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की
ये चौबारे महल उठाये हैं तूने
सुख के सब सामान जुटाए हैं तूने
फिर क्यों बच्चो ने तेरे हरदम आधी रोटी खाई
जागो मज़लूमो और जवानों
तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की
ज़ुल्मों की कब्र तेरे ही हाथ खुदेगी
तेरे ही हाथ नई दुनिया बनेगी
मत ये समझो तूने जीवन की सब पूँजी गवाई
उठ जाओ छात्रों और जवानों
तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की
Thursday, July 28, 2011
पुराने समय की बात है -
पुराने समय की बात है -
महाविध्यालीन पढाई के दौरान कुछ आमदनी हेतु काम करने का विचार किया ....
ऐसा कोई काम जिस से आमदनी हो.... भयानक ख्याल था... मुझे कुछ आता भी ना था...
एक बार मेले में किसी को चावल पर कुछ लिखते देखा बात जाम गई ....
हां ..... कोशिश करूँ तो मैं भी कर सकता हूँ...
तो श्रीमान मैंने भी शुरू किया.... निवाड़गंज से चावल के नमूने मांग लाया... और शुरू कोशिश
अंग्रेजी लिखते तो आसानी से आ गई... लेकिन मज़ा नहीं आया ....
बहुत सारे लोग लिख लेते हैं.... इसमें क्या ख़ास है ???
तो मैंने संस्कृत में जैन नवकार मंत्र लिखा .... एक पद - एक चावल पर.....
फिर भी कोई हल्ला नहीं.......
अंततः मैने अरबी भाषा में पाक पंजतन लिखा (तस्वीर संलग्न है) ......
उसे सजाकर मीना बाज़ार ले गया... वह भाई - ज़ोरदार हल्ला .....
जैन साहब ने कमाल कर दिया... नायब चीज़ .... उम्दा हुनर..... वगैरह वगैरह
कुछ लोगो ने हाथ मिलाया ....कुछ ने हाथ को चूमा ....
जब तमाशा ख़तम हुआ तो मैने कहा...मुझे तारीफ नहीं चाहिए - खरीददार चाहिए.... तो सब भाग खड़े हुए....
बात आई कीमत की....... तो कुछ ने समझाया .... इस का व्यापार नहीं होता.... कीमत नहीं होती .... हदिया होती है.... सो मैने हदिया तय कर दी ७८६ रूपये मात्र .... फिर भी गुंजाईश नहीं - कोई मालदार नहीं....
अबकी बार निगाह "कलमा" पर गई.... मुझे विश्वास था - में लिख लूँगा ......
लेकिन पहले खरीददार तलाशा जाए.....
बड़े नाम चीन लोगो के पास गया .... बड़ी निराशा हुई......
फिर मौलाना साहब के पास ..... वो और बड़े वाले....
पहले तो ये.... कि में देख चुका हूँ.... संग्रहालय में है....
तुम नहीं लिख सकते....
मैं बोला - लिख दिया तो ?? कीमत बोलो......
जो संग्रहालय में है .... वो अमूल्य है..... पर उसकी नक़ल....
(हालाँकि नक़ल जैसी कोई बात नहीं, चावल के दाने पर फोटो कॉपी नहीं होती )
खरब - अरब - करोड़ - लाख - हज़ार - सैकड़ा ......... कोई मूल्य नहीं........
तो तय किया गया - आज के बाद --------------------------------------------------------------------------- हमेशा के लिए बंद
भगवान् भला करे.... शेष शुभ
Friday, July 22, 2011
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