Monday, February 11, 2019

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Tuesday, November 15, 2016

सरहद के पार हाफ़िज़ तेरा

ए दिल है मुश्किल फिल्म से यह भजन / गीत / कविता / इबादत ------------------------------------------------------------ कहते हैं , कविताओं को समझना आसान नहीं , लेकिन कोशिश तो की जा सकती है । आखिर कोई कारण तो रहे होंगे जो यह कविता भारत मे नाज़िल हुई । मेरी रूह का परींदा फड़फडाये लेकिन सुकून का जज़ीरा मिल न पाए वे की करां.. वे की करां.. ...................... अर्थात कवि कहना चाहता है , की रूह फड़फड़ा रही है , सुकून नहीं मिल रहा है , मैं क्या करूँ ? सुकून - अल्लाह की राह मे जिहाद है और वो हो नहीं पा रहा है । रूह बैचेन हो रही है । इक बार को तैजल्ली तो दिखा दे झूठी सही मगर तसल्ली तो दिला दे वे की करां.. वे की करां.. ...................... अर्थात कवि कहना चाहता है , दिल्ली दिखा दे , दिल्ली फतह की झूठी तसल्ली ही दे दे । आखिर वो क्या करें ? रान्झां दे वार बुल्लेया, सुने पुकार बुल्लेया, तू ही तो वार बुल्लेया मुशिद मेरा, मुशिद मेरा तेरा मुकाम कमली, सरहद के पार बुल्लेया, परवरदिगार बुल्लेया हाफ़िज़ तेरा, मुर्शिद मेरा ...................... अर्थात कवि कहना चाहता है , पागल तेरे सच्चे आशिक सरहद के पार ही हैं । सरहद के पार ही हाफ़िज़ सईद है । मैं काबुल से लिपटी तितली की तरह मुहाजिर हूँ एक पल को ठहरूं पल में उड़ जाऊं वे मैं तां हूँ पगडंडी लाभादी ऐ जो राह जन्नत दी तू मुड़े जहाँ मैं साथ मुड़जाऊं ...................... अर्थात कवि कहना चाहता है , मैं मुहाजिर हूँ, देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान चला गया था । अब केवल बम लगाने आता हूँ , और एक पल मे फट जाता हूँ । तेरे कारवां में शामिल होना चहुँ कामिल तराश के मैं क़ाबिल होना चहुँ वे की करां.. वे की करां.. ...................... अर्थात कवि कहना चाहता है , किसी तरह तेरे गिरोह मे शामिल होना चाहता हूँ, बहुत काबलियत से लव जिहाद करना चाहता हूँ । आखिर हम करें क्या ? जिस दिन से आशना से दो अजनबी हुवे हैं तन्हाईओं के लम्हें सब मुल्तबी हुवे हैं क्यूँ आज मैं मोहब्बत फिर एक बार करना चाहूँ हाँ.. ...................... अर्थात कवि कहना चाहता है , विभाजन के बाद हम अजनबी हो गए हैं । आज फिर काफिरों की औरतों से मोहब्बत करना चाहता हूँ, फिर से एक बार करना चाहता हूँ, एक बार के बाद तलाक दे दूँगा । . ये दिल तो ढूंढता है इनकार के बहाने लेकिन ये जिस्म कोई पाबंदियां ना माने मिल के तुझे बगावत ख़ुद से ही यार करना चाहूँ ...................... अर्थात कवि कहना चाहता है , बहुत हुये इंकार के बहाने, बस करो अब्बू जाग जाएँगे , या अल्लाह की देन अभी सोई नहीं है थोड़ा रुको , लेकिन जिस्म की भूख कोई पाबंदी नहीं मानती , मैं भूखा हूँ, तुम नहीं आई तो फरिश्ते तुम पर लानत भेजेंगे । इस भूख के चलते मैं चार निकाह कर सकता हूँ, कई तलाक दे सकता हूँ । मैं तुम काफिर का जिस्म हासिल कर खुद से बगावत करना चाहता हूँ । . मुझमें अगन है बाकी आजमा ले ले कर रही हूँ मैं ख़ुद को तेरे हवाले वे रांझना.. वे रांझना.. ...................... अर्थात कवि कहना चाहता है , इतनी बात के बाद काफिर हसीना ने समर्पण कर दिया है । काफिर हसीना कहती है , मैं आज भी जवान हूँ, आज भी गरम हूँ , मैं तुझको अपना बदन सौंपती हूँ - आ जाओ । . . पता नहीं - अर्थ का अनर्थ ना हो गया हो , लेकिन विद्वान मित्र अनुवाद मे सहायता करें हो सकता है , अर्थ कुछ दूसरा भी हो और मुझे समझ ना आया हो

तुम जो चाहो तो जमाने को हिला सकते हो

कहते हैं , हर शेर आसमान से नाज़िल होता है , बिना अल्लाह के मर्ज़ी के मुकम्मल नहीं होता । मुनव्वर राणा जी ने अगर यह लिखा है तो काबिले तारीफ है , यह बच्चों के सिलेबस मे पढ़ाया जाना चाहिये । हर कोई गहराई तक जाके समझ नहीं सकता , शायर क्या कहना चाहता है , लेकिन फिर भी अमन और मोहब्बत का पैगाम स्पष्ट देखा जा सकता है । आइये कोशिश तो करें, सहज बुद्धि से समझनी की , लिखा तो आमजन की सहज बुद्धि के लिए ही है । . ऐहले मौमीन 👌 . अब फ़क़त शोर मचाने से नहीं कुछ होगा।। सिर्फ होठों को हिलाने से नहीं कुछ होगा।। ज़िन्दगी के लिए बेमौत ही मरते क्यों हो।। अहले इमां हो तो शैतान से डरते क्यों हो।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है । मुंहजोरी के कुछ नहीं होगा , बातों मे कुछ नहीं रखा । जब तुम मर रहे हो तो शैतान से डरते क्यों हो । अगर "ईमान" पर दीन रखते हो तो शैतान से मत डरो । इस्लाम मे शैतान "बुत" के लिए कहा गया है । बुतपरस्तों को भी शैतान कहा जा सकता है । या सीधा संदेश है । काफिर से मत डरो । . तुम भी महफूज़ कहाँ अपने ठिकाने पे हो।। बादे अखलाक तुम्ही लोग निशाने पे हो।। सारे ग़म सारे गिले शिकवे भुला के उठो। दुश्मनी जो भी है आपस में भुला के उठो।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है । तुम भी मरोगे, अखलाक के बाद तुम्हारा नंबर है । सारे फिरके एक हो जाओ । आपस मे इस्लाम के नाम पर एक हो जाओ और युद्ध के लिए तैयार हो । . अब अगर एक न हो पाए तो मिट जाओगे।। ख़ुश्क पत्त्तों की तरह तुम भी बिखर जाओगे।। खुद को पहचानो की तुम लोग वफ़ा वाले हो।। मुस्तफ़ा वाले हो मोमिन हो खुदा वाले हो।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है । अगर तुम एक नहीं हो पाये तो मिट जाओगे, बिखर जाओगे । तुम ईमान पर वफा लाओ, तुम मोमिन हो खुदा वाले हो उनसे अलग हो । . कुफ्र दम तोड़ दे टूटी हुई शमशीर के साथ।। तुम निकल आओ अगर नारे तकबीर के साथ।। अपने इस्लाम की तारीख उलट कर देखो । अपना गुज़रा हुआ हर दौर पलट कर देखो।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है । इस्लाम को ना मानना कुफ्र है , जहन्नुम की आग है , अगर तुम एक बार नारा ए तदबीर का नारा लगा दो , तो बच जाओगे । इस्लाम की तारीख उलट कर देखो , गुजरा हुआ दौर याद करो । कैसे बाबर और औरंजेब ने काफिरों को काटा था । जनेऊ के वजन बराबर कत्लेआम किया था । उस पर फक्र करो । याद करो तुम क्या थे और क्या हो गये । गजवा ए हिन्द कायम करो । . तुम पहाड़ों का जिगर चाक किया करते थे।। तुम तो दरयाओं का रूख मोड़ दिया करते थे।। तुमने खैबर को उखाड़ा था तुम्हे याद नहीं।। तुमने बातिल को पिछाड़ा था तुम्हे याद नहीं।।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है । तुम मे इतनी हिम्मत थी की जज़िया कर तक लगा दिया था। चमड़े की मोहरें चला दी थी । तुम पहाड़ की तरह दुश्मनों का सीना चाक करते थे , हलाक करते थे । तुम दरिया को मोड देते थे । आज भी 6 नदियों का पानी केवल पाकिस्तान ले रहा है । काफिर अपनी नदियों का पानी तक लेने का अधिकार नहीं रखते । तुमने दुश्मनों की कब्र खोदी थी । याद करो , याद करो . फिरते रहते थे शबो रोज़ बियाबानो में।। ज़िन्दगी काट दिया करते थे मैदानों में.. रह के महलों में हर आयते हक़ भूल गए।। ऐशो इशरत में पयंबर का सबक़ भूल गए।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है । अरब की ज़िंदगी याद करो । कैसे भटकते रहते थे । ऊंट पर चलते रहते थे । मुगल बादशाहों के कारण आज तुमको महल मिल गये तो तुम इस्लाम भूल गये ? दीन को फैलाने का सबक भूल गए ? तुम किसलिए मुसलमान बने थे भूल गये ? . अमने आलम के अमीं ज़ुल्म की बदली छाई।। ख़्वाब से जागो ये दादरी से अवाज़ आई।। ठन्डे कमरे हंसी महलों से निकल कर आओ।। फिर से तपते हु सहराओं में चल कर आओ।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है । अमन खत्म हो रहा है । मुस्लिम मारे जा रहे हैं । दादरी मे चोरी करके गाय को काटने पर मार डाला गया । तुम अपना घर बार छोड़कर बाहर आओ , सपने से निकलो , फिर से आग लगा दो हिंदुस्तान मे . लेके इस्लाम के लश्कर की हर एक खुबी उठो।। अपने सीने में लिए जज़्बाए ज़ुमी उठो।। राहे हक़ में बढ़ो सामान सफ़र का बांधो।। ताज़ ठोकर पे रखो सर पे अमामा बांधो।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है । इस्लाम की सेना लेकर हर कोई उठो, सर पर कफन बांध कर मरने मारने तैयार हो जाओ । . तुम जो चाहो तो जमाने को हिला सकते हो।।। फ़तह की एक नयी तारीख बना सकते हो।।। खुद को पहचानों तो सब अब भी संवर सकता है।। दुश्मने दीं का शीराज़ा बिखर सकता है।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है । तुम चाहो तो पंचर बनाने के अलावा बम फोड़ के जमाने को हिला सकते हो, हर मुल्क हो जीत सकते हो । अपने आप को पहचानों , तुम आत्मघाती बम भी बन सकते हो । काफिर दुश्मन तो तबाह कर दो . हक़ परस्तों के फ़साने में कहीं मात नहीं।।।।।।।। तुमसे टकराए "मुंनव़र" ज़माने की ये औक़ात नहीं।। -------------------------------------------- शायर कहना चाहता है ।इस्लाम ने हारना नहीं सीखा , हिंदुस्तान पर तुम्हारा हक़ है , औए किसी की औकात नहीं जो तुमसे टकराए, तुमको रोक सके । . ✏____Munawwar Rana

अहिस्ता हुज़ूर - धीरे धीरे

ग़ज़ल समझना आसान नहीं / फिर भी कोशिश तो की जा सकती है --------------------------------------------------------------------- . सरकती जाये है रुख से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता --------------------------------- नकाब सरक रही है , नाजनीन बेपर्दा हो रही है धीरे धीरे निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता --------------------------------- काले नकाब के गिरने के बाद ऐसा लगता है मानो काले काले भारी पहाड़ों के बीच सूरज निकल रहा हो - धीरे धीरे . जवां होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया परदा --------------------------------- "बड़ी" हो गई तो हमसे ही शर्माने लगी ? और खुद को छिपाने की कोशिश करने लगी ? जबकि बचपन से गोद मे खेली है । . हया यकलख़्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता --------------------------------- शर्म जल्दी आ गई और जवानी धीरे धीरे . सवाल\-ए\-वसल पे उनको उदू का खौफ़ है इतना --------------------------------- आज उनको एक मुलाक़ात करने पर बदनाम होने का डर सता रहा है । . दबे होंठों से देते हैं जवाब आहिस्ता आहिस्ता --------------------------------- मुलाक़ात होगी लेकिन ज़्यादा तेज़ ना चलने की सलाह है । सब्र रखने को कहा जा रहा है । . हमारे और तुम्हारे प्यार में बस फ़र्क है इतना --------------------------------- अब यहाँ मोहब्बत के अंतर बताने की कोशिश है । . इधर तो जल्दी\-जल्दी है उधर आहिस्ता आहिस्ता --------------------------------- नायक को मुलाक़ात मे जल्दी मची है और नायिका कह रही है - धीरे धीरे . वो बेदर्दी से सर काटें अमीर और मैं कहूँ उनसे हुज़ूर आहिस्ता आहिस्ता --------------------------------- नायक जाहिल होने के कारण वहशीपन पर उतर आया और नायिका कह रही है । ऐसी भी क्या जल्दी हुज़ूर - धीरे धीरे . अगर गज़लों को अर्थ समझकर सुनें तो ज़्यादा मज़ा आएगा ।

Thursday, December 6, 2012

स्वस्थ - सुंदर नहीं है - तो गोली मार दो

मैं बहुत से संग्रहालय मे गया हूँ , वहाँ रही तलवार, बंदूक देखकर अपने निरीह होने पर शर्मिंदा होता हूँ ---- बख्तरबंद , हेलमेट (और भी श्रंगार ) सब लोहे का , फिर भारी तलवार ---- इतने सब होने के बाद घोड़े की सवारी --- और युद्ध , मेरी कल्पना के परे है ---- मुझे महाराणा प्रताप के चेतक की कहानी याद आती है की कितना गहरा नाला उसने पार किया था ---- या जबलपुर की बंदर कूदनी .......... सही बात है कि समय के साथ सब की याददाश्त, ऊंचाई , ताक़त सबमे फर्क आया है ......................... बहुत बातें हो रही है कि विवाह मे जाती बंधन समाप्त हो जाने चाइए ......... कुछ लोगो ने क्रांतिकारी कदम भी उठाएँ हैं - फिल्म उद्योग से जुड़ी एक नायिका ने विदेशी क्रिकेट खिलाड़ी के साथ बिना शादी संतान उत्पन्न की --- वैज्ञानिक ही बता पाएंगे उसमे क्या खास है , लेकिन फिर भी बिना शर्त और बंधन के विवाह शुरू हो जाएँ तो क्या हर लड़की "बार्बी डॉल" और हर लड़का " खली " पैदा होने की कितनी संभावना है - और यदि यह सच हो तो देश हित मे ---- काले , मोटे , नाटे , बिकलांग , मूक - बधिर , चंदियल , बीमार, सबके प्रजनन के अधिकार छीन लेने चाहिए -------------------- यदि संतान 90% अंक अर्जित नहीं करती है और वह स्वस्थ - सुंदर नहीं है - तो गोली मार दो(बिना जाती भेदभाव के ) ">

विवाह संस्था बंद हो जाना चाहिए यदि लोग इतना कहते हैं तो .....

बहुत सारे चिंतकों और विचारकों के संदेश पिछले कुछ दिनो पढ़ने मिले कि - शादी - व्याह अब धर्म-जातियों के दायरे से बाहर होना चाहिए - इसके अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं या आने की उम्मीद है ---- सही बात है - कुछ विवाह मैंने - भारतीय युवक और विदेशी कन्या के देखे और कुछ विदेशी युवक के साथ भारतीय कन्या के ,(सुनते हैं कि विदेशों मे कुछ भारतीय लडकीयां खुश नहीं हैं) या ज़्यादातर भारतीय युवक तो विदेशों मे घर जमाई बन गए हैं - कुछ अपने माँ-बाप के अंतिम संस्कार मे भी नहीं आ सके --- और विदेशी ब हुए सास की आत्महत्या का कारण बनी है .... यह अपवाद स्वरूप हो सकता है ---------- सब सुखी रहे - रहना चाहिए ---- भारत मे भी होना चाहिए ---- जब कोई बाप कहे कि उसका समधी साइकिल के पीछे बांस की लंबी खप्पच्ची बांधकर वो जा रहा है , या हरे मोहल्ले मे उसकी हलाल की दुकान है ---- या बेटी बड़े गर्व से बताए - पापा, शहर के बाहर गंदे नाले के पास जो झुग्गी झोपड़ी है उसके आखिर की झोपड़ी मेरी है , और हमको बिजली का पैसा भी नहीं लगता - हालांकि कल "ये" बिजली का तार लटकाने की कोशिश कर रहे थे और चिपकते चिपकते बचे ---- या बहू हमको बताए - पापा, सूअर खाओ, गाय खाओ, अच्छा लगता है मैंने बचपन से खाया है, और यह दशहरा दिवाली सब ढोंग है - हमने कभी नहीं मनाया - आप भी न मनाओ - चर्च चलो , या शांति की तलाश मे किसी मठ मे चलो ------------- कभी कभी लगता है, इन सब के पीछे बहुत गंदी मानसिकता है औरत को प्रजनन की वस्तु समझने की , आने वाला कल किसी भैंस के बाड़े सा न हो जहां बहुत सारी भैंस बंधी होती हैं और एक "पाड़े" वाला आता है, और एक बार की निर्धारित कीमत लेता हैं ..... या हमे इंतज़ार है गमले मे उगाये हुए पीपल के व्रक्ष का फिर भी मैं कहता हूँ आखिर इसमे बुरा क्या है ?? विवाह संस्था बंद हो जाना चाहिए यदि लोग इतना कहते हैं तो .....

Thursday, December 1, 2011

देश कोई रिक्शा तो है नहीं / सुरेश सेन नि‍शांत

देश कोई रिक्शा तो है नहीं
जो फेफड़ों की ताक़त की दम पे चले
वह चलता है पैसों से

सरकार के बस का नहीं
देना सस्ती और उच्च शिक्षा
मुफ़्त इलाज भी
सरकार का काम नहीं

कल को तो आप कहेंगे
गिलहरी के बच्चे का भी
रखे ख़याल सरकार
वे विलुप्त होने की कगार पे हैं

परिन्दों से ही पूछ लो
क्या उन्हें उड़ना
सरकार ने सिखाया है..?

क्या उनके दुनके में
रत्ती-भर भी योगदान है सरकार का
जंगल में
बिना सरकारी अस्पताल के
एक बाघिन ने
आज ही दिया जन्म
तीन बच्चों को
एक हाथी के बच्चे ने
आज ही सीखा है नदी में तैरना

बिना सरकारी योगदान के
पार कर गया नीलगायों का झुण्ड
एक खौफ़नाक बहती नदी

सरकार का काम नहीं है
कि वो रहे चिन्तित

उन जर्जर पुलों के लिए
जिन्हें लाँघते है हर रोज़
ग़रीब गुरबा लोग

सरकार के पास नहीं है फुर्सत
हर ग़रीब आदमी की
चू रही छत का
रखती रहे वह ख़याल
और भी बहुत से काम है
जो करने हैं सरकार को

मसलन रोकनी है महँगाई
भेजनी है वहाँ सेना
जहाँ लोग बनने ही नहीं दे रहे हैं
सेज

सरकार को चलाना है देश
वह चलता है पैसों से
और पैसा है बेचारे अमीरों के पास
आज ही सरकार
करेगी गुज़ारिश अमीरों से
कि वे इस देश को
ग़रीबी में डूबने से बचाए

देश की भलाई के लिए
अमीर तस्करों तक के आगे
फैलाएगी अपनी झोली
बदले में देगी
उन्हें थोड़ी-सी रियायतें

क्योंकि देश कोई रिक्शा तो नहीं
जो फेफड़ों की ताक़त के दम पे चलें
वह तो चलता है पैसों से

....................... देश कोई रिक्शा तो है नहीं / सुरेश सेन नि‍शांत

Tuesday, September 27, 2011

अरे बचा लो देश

अरे बचा लो देश"...................!!!!!!!
देश लिया सब चूँस..........तुम्हारी ..............!
बचा खुचा लो ठूँस, तुम्हारी..............!

जबसे दर्शन किये तुम्हारे
जनता भूकों मर गई
ऐसे हो मनहूस, तुम्हारी.................!

किस पर जनता करे भरोसा
किसको गले लगाये
"सबके सब" फडतूस,तुम्हारी.......!

अन्व्याही फ़ाइल का
तब तक शीलभंग हो कैसे
मिले न जब तक घूंस, तुम्हारी ......!

बच्चे सब एयरकंडीसन
पत्नी वातानूकूलित,
मई भी तुमको पूस, तुम्हारी...............!

कुर्बानी को लाल हमारे
और तुम्हारे बेटे पढें अमेरिका रूस,
तुम्हारी.......................!

आप मरें तो चिता में लकड़ियाँ चन्दन की,
हमें घाँस और फूस, तुम्हारी ................!

तेल नहीं अपनी ढिबरी में और
तुम्हारे घर में इटली के फानूस, तुम्हारी..................!

तुमको चाहिए रात को व्हिस्की
और मटन की खुश्की
पियो सुबह तुम जूस, तुम्हारी..................!

अर्धनग्न है देश व्यवस्था
फिरें गरीब चड्डी में
नंगा चले जुलूस, तुम्हारी .............!

करेगा नंगा चौराहे पर एक दिन
तुम सबको "जन लोकपाल कानून",
तुम्हारी..................!

अरे बचा लो देश,
तुम्हारी.................!!!!!!!!!!!

*मानिक वर्मा*

Friday, September 16, 2011

ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है

यह जो छापा तिलक लगाये यह जो जनेऊ धारी हैं
यह जो जात पात पूजक हैं यह जो भ्रष्टाचारी हैं
यह जो भूपति कहलाता है जिसकी साहूकारी है

उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है
ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी
है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है

यह जो तिलक मांगता है लडके की धौंस जमाता है
कम दहेज़ पाकर लड़की का जीवन नर्क बनता है
पैसे के बल यह जो अनमेल ब्याह रचाता है
यह जो अन्याई है सब कुछ ताक़त से हथियाता है

उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है
ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी
है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है

यह जो कला धन फैला है यह जो चोर बाजारी है
सबका पाऊं चूमती जिसके ये सरमायेदारी है
यह जो यम सा बेटा है मतदाता की लाचारी है

उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है
ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है, ज़ारी
है ज़ारी है अभी लड़ाई ज़ारी है

हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे

हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे

यहाँ पर्वत पर्वत हीरे हैं यहाँ सागर सागर मोती हैं
ये सारा माल हमारा है
ये सारा माल हमारा है
ये सारा माल हमारा है
हम सारा खज़ाना मांगेगे

हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे

हमारे खून बहे जो बाग़ उजड़े
जो गीत दिलों में कत्ल हुए
हर कतरों का हर गुंचे का
हर गीत का बदला मांगेगे

हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे

जब सब सीधा हो जायेगा
जब सब झगडे मिट जायेंगे
हम मेहनत से उपजायेंगे
हम मेहनत से उपजायेंगे
हम मेहनत से उपजायेंगे
बस बाँट बाँट कर खायेंगे

हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
हम मेहनत कश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे
एक खेत नहीं, एक देश नहीं
हम सारी दुनिया मांगेगे
हम सारी दुनिया मांगेगे

Thursday, September 15, 2011

तस्वीर बदल दो दुनिया की

तोड़ो ये दीवारें भर दो अब ये गहरी खाई
तोड़ो ये दीवारें भर दो अब ये गहरी खाई
जागो दुखियारे इंसानों
तस्वीर बदल दो दुनिया की

चलती मशीनें ये तेरे ही हाथों से
उगते हैं फसलें ये तेरे ही हाथों से
क्यों फिर ले जाते हैं ? जुल्मी जोग तुम्हारी कमाई
उठो मजदूरों और किसानो
तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की

ये चौबारे महल उठाये हैं तूने
सुख के सब सामान जुटाए हैं तूने
फिर क्यों बच्चो ने तेरे हरदम आधी रोटी खाई
जागो मज़लूमो और जवानों
तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की

ज़ुल्मों की कब्र तेरे ही हाथ खुदेगी
तेरे ही हाथ नई दुनिया बनेगी
मत ये समझो तूने जीवन की सब पूँजी गवाई
उठ जाओ छात्रों और जवानों
तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की, तस्वीर बदल दो दुनिया की

Thursday, July 28, 2011

पुराने समय की बात है -


पुराने समय की बात है  -
महाविध्यालीन पढाई के दौरान कुछ आमदनी हेतु काम करने का विचार किया ....
ऐसा कोई काम जिस से आमदनी हो.... भयानक ख्याल था... मुझे कुछ आता भी ना था...
एक बार मेले में किसी को चावल पर कुछ लिखते देखा बात जाम गई ....
हां ..... कोशिश करूँ तो मैं भी कर सकता हूँ... 
तो श्रीमान मैंने भी शुरू किया.... निवाड़गंज से चावल के नमूने मांग लाया... और शुरू कोशिश
अंग्रेजी लिखते तो आसानी से आ गई...  लेकिन मज़ा नहीं आया ....
बहुत सारे लोग लिख लेते हैं.... इसमें क्या ख़ास है ???

तो मैंने संस्कृत में जैन नवकार मंत्र लिखा .... एक पद - एक चावल पर.....
फिर भी कोई हल्ला नहीं.......

अंततः मैने अरबी भाषा में पाक पंजतन लिखा (तस्वीर संलग्न है) ......
उसे सजाकर मीना बाज़ार ले गया... वह भाई - ज़ोरदार हल्ला .....
जैन साहब ने कमाल कर दिया... नायब चीज़ .... उम्दा हुनर..... वगैरह वगैरह
कुछ लोगो ने हाथ मिलाया ....कुछ  ने हाथ को चूमा ....

जब तमाशा ख़तम हुआ तो मैने कहा...मुझे तारीफ नहीं चाहिए - खरीददार   चाहिए.... तो सब भाग खड़े हुए....

बात आई कीमत की....... तो कुछ ने समझाया .... इस का व्यापार नहीं होता.... कीमत नहीं होती .... हदिया होती है.... सो मैने हदिया तय कर दी ७८६ रूपये मात्र .... फिर भी गुंजाईश नहीं - कोई मालदार नहीं....

अबकी बार निगाह "कलमा" पर गई.... मुझे विश्वास था - में लिख लूँगा ......
लेकिन पहले खरीददार तलाशा जाए.....

बड़े नाम चीन लोगो के पास गया .... बड़ी निराशा हुई......
फिर मौलाना साहब के पास ..... वो और बड़े वाले....
पहले तो ये.... कि में देख चुका हूँ.... संग्रहालय में है....
तुम नहीं लिख सकते....

मैं बोला - लिख दिया तो ?? कीमत बोलो......
जो संग्रहालय में है .... वो अमूल्य है..... पर उसकी नक़ल....
(हालाँकि नक़ल जैसी कोई बात नहीं, चावल के दाने पर फोटो कॉपी नहीं होती )
खरब - अरब - करोड़ - लाख - हज़ार - सैकड़ा ......... कोई मूल्य नहीं........
तो तय किया गया - आज के बाद --------------------------------------------------------------------------- हमेशा के लिए बंद
भगवान् भला करे.... शेष शुभ

Friday, July 22, 2011

hamarivani.com

www.hamarivani.com

हमारे शहर में सिनेमाघर कितने थे ?

हमारे शहर में सिनेमाघर कितने थे ?? ३२ सिनेमाघर का सुना था मैंने ----
आप सहायता करें नाम याद करने में
१ .  नवीन ज्योति (पनागर)
२.  वैभव (पायल)
३.  अम्पायर
४.  डिलाइट
५.  श्री कृष्णा
६.  सुभाष
७.  पंचशील
८.  लक्ष्मी
९.  आनंद
१०. प्रभु वंदना
११.  ज्योति
१२. विनीत
१३. जयंती
१४. शीला
१५. शारदा
१६.  श्याम
१७.  सरस्वती
१८.  नवनीत [रांझी]
१९.  डिफेंस (कल्पना)
२०.  सावित्री
२१.  महावीर
२२
२३
२४
२५
२६
२७
२८
२९
३०
३१
३२

Thursday, July 21, 2011

ऐसी हैं हमारे जबलपुर की यादें

वो जिलहरी की शाम
वो छोटी लाइन फाटक का जाम
वो नर्मदा रोड की हवा
वो विक्टोरिया की दवा
वो धुआंधार की ठंडक
वो सदर का मज़ा
वो गोरखपुर की शॉपिंग
वो मोबाइल की टाकिंग
वो बडकुल की जलेबी
वो अन्ना का डोसा
वो कमानिया की रबड़ी
वो फ्रीजो की आइसक्रीम
वो सिविक सेंटर की चाट
वो डिलाइट की चाय
वो पचपेढ़ी की सड़के
जहाँ कितने दिल धडके
वो मस्ती की बातें
ऐसी हैं हमारे जबलपुर की यादें

Monday, July 18, 2011

More Information about jabalpur

http://en.wikipedia.org/wiki/Jabalpur

हमारे जबलपुर में एक समय १३ तलैया और ५२ तालाब थे ..

हमारे जबलपुर में एक समय १३ तलैया और ५२ तालाब थे ..

तलैया -
१. श्रीनाथ की तलैया
२. तिलक भूमि की तलैया
३. जूडी तलैया
४. भानतलैया
५. छुट्टू मियाँ की तलैया,
६.  बेनीसिंह की तलैया
7.  अलाफ्खान की  तलैया
8.  सेवाराम  की  तलैया
9.  साईं  तलैया
10. नौवा तलैया
11. सूरज  तलैया
12. फूलहारी  तलैया
13. जिंदल  तलैया



ताल -
१.   अधारताल
२.   मढ़ोताल
३.   हनुमानताल
४.   फूटाताल
५.   मढ़ाताल
६.    देवताल
७.   हाथीताल
८.   भंवरताल
९.   चेरीताल
१०.  रानीताल
११.  शाहीताल
१२.  गुलौआ ताल
१३.  गंगा सागर ताल
१४.  खेमताल
१५.  सूपाताल
१६.  संग्राम सागर ताल
१७.  खम्बताल
१८.  बघा ताल
१९.  बाल सागर
२०.  ठाकुर ताल
२१.  गोकुलपुर तालाब
२२.  शाही तालाब
२३  मचरहाई  ताल   
24.  महानद्दा
25.  कोलाताल
26.  तिरहुतिया ताल
27.  गुरहाताल
28.  सुरजला ताल
29.  अवस्थि ताल
30.  बासा तालाब
31.  बाल सागर
32.  हिनौता  ताल
33.  सगराताल
33.  चौकिताल
34.  सूखाताल  
35.  महाराज सागर
36.  कूरनताल
37.  अमखेरा ताल  
38.  बाबा ताल
39.  ककरैया  ताल
40.  गनेश ताल
41.  कटरा ताल
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कृपया आप मदद करें बाकी नाम बताने में